Lawyer's Chamber No. T-20, Tis Hazari Courts expertdeepakjain@gmail.com

हस्तलेख, हस्ताक्षर व अंगूठा-निशान विशेषज्ञ

दीपक जैन — तीस हज़ारी कोर्ट, दिल्ली, 1990 से

दीपक जैन 1990 से तीस हज़ारी कोर्ट, दिल्ली में हस्तलेख, हस्ताक्षर और अंगुली-छाप (फ़िंगरप्रिंट) विशेषज्ञ के रूप में कार्य कर रहे हैं। विवादित हस्ताक्षर, जाली दस्तावेज़ या अंगूठे के निशान से जुड़े मामलों में वे वैज्ञानिक जाँच करके कारण सहित लिखित राय (एक्सपर्ट ओपिनियन) देते हैं, और आवश्यकता होने पर न्यायालय में गवाही भी देते हैं। देश भर के मामलों में राय दी जाती है।

सेवाएँ

  • हस्तलेख व हस्ताक्षर की जाँच — विवादित हस्ताक्षर या लिखावट की तुलना उसी व्यक्ति के स्वीकृत (असली) हस्ताक्षरों से, यह जानने के लिए कि वे एक ही व्यक्ति के हैं या नहीं।
  • जालसाज़ी और काट-छाँट की पहचान — नकली या ट्रेस किए गए हस्ताक्षर, बाद में जोड़े गए शब्द या अंक, मिटाना और ओवरराइटिंग।
  • अंगूठे व उँगलियों के निशान — डीड, रसीद और शपथपत्र पर लगे विवादित निशान की तुलना नमूना निशानों से।
  • स्याही, कागज़ और पेन की जाँच — सभी प्रविष्टियाँ एक ही पेन से की गईं, या कुछ बाद में जोड़ी गईं।
  • रेवेन्यू स्टाम्प की अवधि — रसीद या अनुबंध पर लगे स्टाम्प के प्रचलन-काल की जाँच।
  • टाइप किए गए दस्तावेज़ों की पहचान
  • न्यायालय में गवाही और परामर्श — अधिवक्ताओं को मुकदमे से पहले और उसके दौरान तकनीकी सहायता।

किन मामलों में

  • वसीयत, सेल डीड, जीपीए, एग्रीमेंट टू सेल जैसे संपत्ति के दस्तावेज़
  • चेक बाउंस (धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम) और बैंक से जुड़े विवाद
  • रसीद, प्रोनोट, ऋण और लेन-देन के दस्तावेज़
  • जालसाज़ी और धोखाधड़ी के आपराधिक मामले, गुमनाम पत्र
  • पारिवारिक समझौते, बँटवारा और अन्य दीवानी मुकदमे

जाँच कैसे होती है

  1. परामर्श — चैंबर में, या फ़ोन, ईमेल अथवा व्हाट्सऐप पर मामला समझा जाता है।
  2. सामग्री का आकलन — विवादित दस्तावेज़ और तुलना के नमूने पर्याप्त हैं या नहीं, यह शुरू में ही बता दिया जाता है।
  3. वैज्ञानिक जाँच — आवर्धक लेंस, माइक्रोस्कोप, अल्ट्रावायलेट व इन्फ्रारेड प्रकाश और फ़ोटोग्राफ़ी द्वारा।
  4. राय (रिपोर्ट) — कारणों और फ़ोटो सहित लिखित राय।
  5. गवाही — न्यायालय द्वारा बुलाए जाने पर राय के कारण समझाना और जिरह का उत्तर देना।

साथ क्या लाएँ

  • विवादित दस्तावेज़ — हो सके तो मूल (ओरिजिनल), अन्यथा सबसे साफ़ प्रति।
  • उसी व्यक्ति के स्वीकृत हस्ताक्षर या लिखावट — जैसे बैंक रिकॉर्ड, पुराने चेक, पत्र, पहले के दस्तावेज़ — विशेषकर विवाद शुरू होने से पहले के।
  • मुकदमे का विवरण — कोर्ट, केस नंबर और अगली तारीख।
  • दस्तावेज़ को न मोड़ें, न स्टेपल करें और न ही उस पर कुछ लिखें।

संपर्क

लॉयर्स चैंबर नं. T-20, तीस हज़ारी कोर्ट, दिल्ली-110054
फ़ोन: +91 98110 76635, +91 98990 76635
ईमेल: expertdeepakjain@gmail.com

आपकी पहचान, आपके दस्तावेज़ और जाँच का परिणाम पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं। सामान्य प्रश्नों के उत्तर यहाँ पढ़ें।

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